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शिंवलिंग पर इस तरह भूल से भी न चढ़ाये बेलपत्र

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शिंवलिंग पर इस तरह भूल से भी न चढ़ाये बेलपत्र

बेलपत्र को संस्कृत में ‘बिल्वपत्र‘ कहा जाता है. यह भगवान शिव को बहुत ही प्रिय है. ऐसी मान्यता है कि बेलपत्र और जल से भगवान शंकर का मस्तिष्क शीतल रहता है. पूजा में इनका प्रयोग करने से वे बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं.

इसके लिए सावन का महीन बहुत ही पवित्र माना गया है क्योकि यह महादेव शिव का महीना होता है. भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए इस महीने शिव पूजा तथा व्रत आदि करते है. इस महीने में भगवान शिव के मंदिर में शिव अभिषेक करने के लिए भक्तो की भीड़ लगी रहती है. भगवान भोलेनाथ बहुत ही दयालु है तथा अपने भक्तो की मनोकामना शीघ्र पूर्ण कर देते है.

इस विषय में कई कथाएं प्रचलित हैं| इनमें सबसे महत्वपूर्ण एक  प्रसंग है,  प्राचीन काल में एक बार देवताओं और दानवों दोनों ने मिलकर सागर मंथन किया था| सागर मंथन के दौरान समुद्र से कई चीजें निकली| इनमे से कुछ अच्छी थीं और कुछ बुरी| इसी मंथन के फलस्वरूप समुद्र से हलाहल नामक विष भी निकल आया जो इतना भयानक विष था कि इसके प्रभाव से पूरे संसार का विनाश हो सकता था| इस विष से संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव ने इस विष को पी लिया और यह विष उनके कंठ में रह गया, इसलिए उनका एक नाम नीलकंठ भी हो गया| इस विष के प्रभाव से भगवान शिव का मस्तिष्क गर्म हो गया और वो बेचैन हो उठे| देवताओं ने उनके सर पर जल उड़ेला तो उनके सर की जलन तो दूर हो गयी लेकिन कंठ की जलन बनी रही| इसके बाद देवताओं ने उन्हें बेलपत्र खिलाना शुरू किया क्योंकि बेलपत्र में विष के प्रभाव को ख़त्म कर देने का गुण होता है| इसीलिए शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्त्व है|
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भगवान शिव की पूजा में बेलपत्रों का बहुत अधिक महत्व है. भगवान शिव की पूजा बगैर बेलपत्रों के अधूरी मानी जाती है. परन्तु दोस्तों भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ते समय कुछ ख़ास बात का ध्यान रखना चाहिए अन्यथा भगवान शिव नाराज हो जाते है.

1.शिवलिंग पर चढ़ाये जाने वाले बेलपत्र अखंडित नहीं होने चाहिए. अर्थात बेलपत्र कही से भी कटे फ़टे नहीं होने चाहिए केवल सही बेलपत्र ही शिवपूजा के प्रयोग में लाये.

2.भगवान शिव की पूजा में तीन पत्तो वाला बेलपत्र ही उपयुक्त होता है. अतः शिवलिंग में तीन पत्तो वाला बेलपत्र ही अर्पित करे.

2.कभी भी सोमवार, अमावश्या, पूर्णिमा, अष्टमी, चतुर्दशी को बेलपत्र ना तोड़े, क्योकि इस दिन तोड़े बेलपत्र शिवलिंग पर चढ़ाने से शिव क्रोधित होते है.

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