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अरुनीमा सिन्हा (Indian Mountaineer) जीवन परिचय | Arunima Sinha biography in hindi

Arunima Sinha Jivan Parichay wiki, age & more

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अगर आप पर भारत के गिने-चुने पर्वतारोही में से एक अरुणिमा सिन्हा के जीवन के बारे में जानना चाहते हैं, और साथ में अगर आपको भी ऐसी भारतीय महिलाओं के इतिहास के बारे में जानने की इच्छा है जिन्होंने की अपनी करियर में बहुत मुकाम हासिल किया हो या फिर इतिहास रच दिया हो तो यह पोस्ट आपकी बहुत काम का है क्योंकि आज हम इस पोस्ट में अरुणिमा सिन्हा कौन है और उन्होंने अपने जीवन में क्या-क्या हासिल किया है इसी के ऊपर बात करने वाले हैं तो अगर आपको भी और अरुनीमा सिन्हा (Arunima Sinha) के जीवन परिचय के बारे में जानना है तो आप इस आर्टिकल को ध्यान पूर्वक पढ़ सकते हैं और अरुणिमा के जीवन परिचय के बारे में संपूर्ण जानकारी ले सकते हैं।

Arunima Sinha on Mountain

उससे पहले आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अरुणिमा भारत की पहली विकलांग महिला है जो कि माउंट एवरेस्ट को फतह की है, और इसी उपलब्धि के कारण उनका नाम गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है।

नाम : अरुणिमा सिन्हा
जन्म : 20 July 1989
जन्मस्थान : सुल्तानपुर, उत्तरप्रदेश
प्रसिद्ध : प्रवतारोही (विकलांग), बॉलीबाल खिलाडी
माता के नाम : Update Soon
पति के नाम : Update Soon
दुर्घटना : 11 अप्रैल 2011 ( पद्मावती एक्सप्रेस)
माउंट एवरेस्ट फतह : 21 May 2013

Arunima Sinha biography : भारत के गिने-चुने पर्वतारोहियों में से एक अरुणा सिन्हा का जन्म सन 1989 को भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के सुल्तानपुर जिले में एक मिडिल क्लास सिन्हा परिवार में हुआ है, अरुणिमा को बचपन से ही एक सपोर्ट पर्सन बनने का शौक था और वह एक सक्सेसफुल वॉलीबॉल प्लेयर भी हैं, और उन्होंने वॉलीबॉल नेशनल लेवल तक खेला है। अरुणिमा हमेशा से ही एक वॉलीबॉल प्लेयर बनना चाहती थी लेकिन उनकी जिंदगी में कुछ ऐसा घटित हुआ जिसके कारण वह एक पर्वतारोहियों बन गई।

Arunima Sinha personal Life

वहीं अगर उनकी निजी जीवन के बारे में बात करें तो उनकी शादी साल 2018 में हो गया है और वह अपने पूरे परिवार के साथ उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर में रहती हैं।

Arunima Sinha Career

अरुणिमा सिन्हा ने अपने करियर की शुरुआत एक नेशनल लेवल वॉलीबॉल प्लेयर्स के तौर पर साल 2009 मे की है, और वह बॉलीवाल मे भारत को भी रिप्रेजेंट कर चुकी हैं। और उसके बाद कुछ ट्रेन दुर्घटनाओं के कारण उन्होंने अपने पर्वतारोही करियर की शुरुआत साल 2013 में माउंट एवरेस्ट को फतह करके की है। और उसके बाद अब तक वो अफ्रीका की किलिमंजारो (Kilimanjaro: To the Roof of Africa) और यूरोप की एलब्रुस चोटी (Mount Elbrus) पर भारत के तिरंगा लहरा चुकी हैं। और वह आज के दौर में भारत के मोस्ट सक्सेसफुल पर्वतारोहियों में से एक है।

अभी तो इस बाज की असली उड़ान बाकी है, अभी तो इस परिंदे का इम्तिहान बाकी है। अभी अभी तो मैंने लांघा है समंदरों को, अभी तो पूरा आसमान बाकी है!!!
By : Arunima Sinha

अरुणिमा सिन्हा का ट्रेन दुर्घटना।

वहीं अगर अरुणिमा के ट्रेन दुर्घटना के बारे में बात करें तो अरुणिमा 11 अप्रैल 2011 को पद्मावती एक्सप्रेस से लखनऊ से दिल्ली जा रही थी उसी क्रम में उनके ट्रेन के बोगी में कुछ बदमाशों ने हमला कर दिया था, और उनके सोने की चैन को छीनने की कोशिश के क्रम में उन्हें ट्रेन से बरेली के पास धक्का देकर के नीचे गिरा दिया गया था जिसके कारण उनके दोनों पैर कट गए थे और वह रात भर वही ट्रैन के पटरी पड़ी रही।

वही अरुणिमा मीडिया को इंटरव्यू देते हुए अपने दुर्घटना के बारे में बताती है कि वह रातभर ट्रेन के पटरी पर पड़ी हुई थी और लगभग में 40 से 50 ट्रैन उनके आजु और बाजू से गुजर गए थे लेकिन फिर भी किसी ने उन्हें बचाने की कोशिश नहीं किया, और यही नहीं बल्कि उनके पैरो को रात भर चूहे भी कुतर रहे थे लेकिन फिर भी अरुणिमा ने हार नहीं माना और किसी तरह से उन्होने ट्रेन के पटरी पर रात गुजारे।

और उसके बाद सुबह वही के किसी निजी अस्पताल में अरुनीमा को भर्ती किया गया, जहां उन्हें डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था लेकिन फिर भी अरुणिमा ने उन डॉक्टरों को कहा कि बिना anaesthesia के उनके पैरों को काट दिया जाए और उनके पैर काट दिय गए। और उसके बाद उनके बेहतर इलाज के लिए दिल्ली के एम्स के अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उन्हें डॉक्टरों ने एक आर्टिफिशियल पैर लगा दिया।

अरुणिमा सिन्हा को दिए गए पुरस्कार।

अरुणिमा को उनकी इस साहस और परिचय के लिए उन्हें 2 पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, जिसमें सुल्तानपुर रत्न अवॉर्ड से और सन 2016 में अरुणिमा को अम्बेडकरनगर रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

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FAQ?

Q.पर्वतारोहण के क्षेत्र में अरुणिमा को दूसरी सफलता कहाँ मिली?

Ans : अरुणिमा ने माउंट एवरेस्ट फतह करने के बाद दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटियों में शुमार अंटार्कटिका के ‘विन्सन मैसिफ़’ हिल पर छोड़ने में सफलता हासिल कर ली है, और यह उनकी दूसरी सफलता है।

Q.अरुणिमा का जन्म कहाँ हुआ था?

Ans : अरुणिमा सिन्हा का जन्म भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर में 10 जून 1988 को हुआ है। और वह एक प्रसिद्ध नेशनल चैंपियन बॉलीबाल प्लेयर थी, और उन्होंने नेशनल लेवल पर गोल्ड मेडल तक जीत रखा था।

Q.अरुणिमा ने एवरेस्ट की यात्रा कितने दिनों में पूरी की?

Ans : अरुणिमा ने अपनी एवरेस्ट की यात्रा साल 2013 में शुरू की और उन्होंने यात्रा महज 52 दिनों में तय कर लिया था।, और वह माउंट एवरेस्ट की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंच गई थी।

Q. अरुणिमा सिन्हा के ट्रेन एक्सीडेंट कब हुआ था?

Ans : अरुणिमा जब अपने वॉलीबॉल स्पोर्ट्स इवेंट से संबंधित किसी काम के लिए अपने घर से 12 अप्रैल 2011 को पद्मावती एक्सप्रेस से दिल्ली जा रही थी तो तो उन्होंने अपने गले में कुछ गोल्डन यानी कि सोने की चेन पहन रखी थी जिसे देखकर ट्रेन में चढ़े कुछ बदमाशों ने खींचने की कोशिश की जिसके क्रम में वह ट्रेन से नीचे गिर गए। और उस समय रात का समय था जिससे उन्हें रात भर ट्रेन की पटरियों के बीच में गुजारना पड़ा था।

निष्कर्ष –

अगर आप भी अपने जीवन में निराशा के दौर से गुजर रहे हैं या कोई आश्चर्यजनक घटना से गुजर रहे है तो आपको अरुणिमा सिन्हा के जीवन परिचय को एक बार जरूर पढ़ना चाहिए। क्योंकि अरुनीमा के जीवन की घटना एक मोटिवेशन का दुकान है। धन्यवाद 🙏🙏

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